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Tuesday, 9 September 2014

बारिश

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक दुसरा )


“ बारिश ”

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

दो बूंद न मुकद्दर में थे जब अक्स मेरा न था मुझ में ही कही
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
दो बूंद न मुकद्दर में थे जब न थी साथ मेरी परछाई
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
दो बूंद न मुकद्दर में थे जब भीख में मांगी थी खुशियाँ सर-ए-बाज़ार
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
दो बूंद न मुकद्दर में थे जब ढूंढ़ता था खुद को गली गली
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
दो बूंद न मुक्कदर में थे जब भटकता था रातभर जुगनुओं की तलाश में
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
दो बुंद न मुकद्दर में थे जब रातें कट जाती थी यूँ ही तनहा
रूबरू हुआ कफ़न से मैं तो बारिश थमने को तैयार न हुई
 
-विशाल इंगळे

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

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