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Tuesday, 9 September 2014

हृदयस्पर्शी...

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक दुसरा )


“ हृदयस्पर्शी... ”

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

  दिल्ली रेप विक्टीम "दामिनी" ला अमिताभ बच्चन यांनी आपल्या या ह्रुदयस्पर्शी कवितेने श्रद्धांजली दिली होती...

माँ बोहोत दर्द सह कर..
बोहोत दर्द दे कर..
तुझसे कुछ कह कर
मैं जा रही हूँ........
आज मेरी विदाई में जब
सखियाँ मिलने आयेंगी...
सफ़ेद जोडे में लिपटी देख सिसक सिसक मर जायेंगी...
लड़की होने का खुद पे फिर वो अफ़सोस जतायेंगी.....
माँ तू उनसे इतना कह देना
दरिंदो की दुनिया में संभल कर रहना......
माँ राखी पर जब भैया की
कलाई सुनी रह जायेगी..
याद मुझे कर कर जब उनकी आँख भर आयेगी...
तिलक माथे पर करने को माँ
रूह मेरी भी मचल जायेगी...
माँ तू भैया को रोने ना देना...
मैं साथ हूँ हर पल उनसे कह देना......
माँ पापा भी छुप छुप बोहोत रोयेंगे...
मैं कुछ न कर पाया ये कह के खुद को कोसेंगे.....
माँ दर्द उन्हें ये होने ना देना..
इलज़ाम कोई लेने ना देना...
वो अभिमान है मेरा सम्मान है मेरा..
तू उनसे इतना कह देना........
माँ तेरे लिए अब क्या कहु..
दर्द को तेरे शब्दों में कैसे बांधू...
फिर से जीने का मौक़ा कैसे मांगू......
माँ लोग तुझे सतायेंगे....
मुझे आज़ादी देने का तुझपे इलज़ाम लगायेंगे....
माँ सब सह लेना पर ये ना कहना
"अगले जनम मोहे बिटिया ना देना".....
 
- अमिताभ बच्चन
 
डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

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