Popular Posts

Tuesday, 9 September 2014

सोचती रेहती हूँ तनहाई में...

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक दुसरा )


“ सोचती रेहती हूँ तनहाई में... ”

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

  सोचती रेहती हूँ तनहाई में...
की वोह भी मुझे याद करते होगे न...?
बीते हुए लम्हों को फिरसे याद करके,
दिल को बहला तो लेते होगे न...?
मुझे तो लगता है शायद गम नहीं है उन्हें,
के गुजरा हुआ दिन फिर लौट नहीं आता...
सागर में कितने ही गोते लगा लो,
जो प्यार का मोती खो गया...
वोह कभी खोजने से नहीं मिलता...

- सोनल वानखडे

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

No comments:

Post a Comment