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Tuesday, 9 September 2014

दिल की गलियारों में जब...

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक दुसरा )


“ दिल की गलियारों में जब... ”

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
अनुक्रमणिका

दिल की गलियारों में जब न नज़र तू आती हैं
साँसे थम जाती हैं और धड़कन रुक सी जाती हैं...
 
न जाने कैसी कशिश है तुझमें
दिन रात खोया रहता हूँ तुझमें
सब से पहले पूजा करता हूँ तुझको
भुलाउंगा कैसे तुझे पता नहीं मुझ को
 
पूरी रात आजकल मैखाने में गुज़र जाती हैं...
 
शराब से भी तुझे भुलाया नहीं जाता
काश ए-दिल तू मेरे ज़िन्दगी में ही न आता
दो पल ही सही ज़िन्दगी जैसे तैसे कट जाती
चाहे रोशनी ज़िन्दगी में मेरे अंधेरा ही ले आती
 
अनजाने ही तू मेरी हर ग़ज़ल में आ जाती हैं...

- विशाल इंगळे

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक दुसरा) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3waE9uYXpjS2VhZFU/edit?usp=docslist_api

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