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Tuesday, 24 June 2014

न जाने कब...

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक पहिला )


" न जाने कब...."

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3wd2FkRDFISVRGMUk/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
अनुक्रमणिका

लोग छोटी छोटी बातों से खफ़ा हो जाते है......
छोटी छोटी बातों पे खुश होना कब सीखेंगे.......?
 
जिंदगी की दौड में चले जा रहे है यूँ ही....
कही रुक के थोडी साँस लेना कब सीखेंगे.....?
 
छोटी सी गलती से रिश्ते तूट जाते हैं यहाँ....
बचपन का फसाना, रूठ कर मनाना कब सीखेंगे....?

राह चलते बारिश हो तो छत ढूंढने लगते है सब......
छतसे निकलकर बूंदे चुराना कब सीखेंगे....?
 
लोगो की भीड़ में खुद की पहचान खो देते है......
अकेले बैठकर खुद को पहचानना कब सीखेंगे......?
 
हर किसी को अपने औदे का गुरुर है यहाँ.......
नज़ाकत में सादगी लाना कब सीखेंगे.....?

कुछ बहाने दर्द भरे देती रहती है जिंदगी.....
सौ बहाने खुशियों भरे जिंदगी को देना कब सीखेंगे.....?

हर कोई बेहोशी में अपनी ही बात कहे जा रहा है......
कुछ मेरी सुन कुछ अपनी सुना
यह अंदाज-ए-गुफ्तगू कब सीखेंगे.....?
 
किसी एक गलती पे दुश्मन बना के ज़ेहन में बसा लेते हैं....
माफ़ कर के भूल जाना कब सीखेंगे....?
 
लोग खेलते है यहाँ दूसरों को हराने....
खुद जीतने के लिए खेलना कब सीखेंगे.....?

© सुनिल ऊके  
 
डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3wd2FkRDFISVRGMUk/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
अनुक्रमणिका


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