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Tuesday, 24 June 2014

कब्र

मनापासून

                        मनापर्यंत......

( वर्ष पहिले, अंक पहिला )


" कब्र "

डाउनलोड लिंक (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3wd2FkRDFISVRGMUk/edit?usp=docslist_api

ऑनलाइन वाचा (मनापासून मनापर्यंत-अंक पहिला) :
अनुक्रमणिका

जब डुब रहि थी कश्ती,
हाथ तो बढाया नहि...
अब जनाजे पे मेरे
अफसोस बया ना करो
 
चाहे समझा था तुमने
पाणी मेरे अश्को को
पर कब्र पर मेरे हर रोज यूँ
मोतीयों को छलकाया ना करो
 
जिंदगी में जगहा ना दे पायी तुम थोडि
इसका गम कुछ नहि
जा तो चुका हुँ
अब जिंदगी से तेरे,
बार बार आ के यहाँ अब
फिर से रुलाया ना करो

© विशाल इंगळे  
 
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https://docs.google.com/file/d/0B0ZIieqS6P3wd2FkRDFISVRGMUk/edit?usp=docslist_api

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